मुनि इंटरनेशनल स्कूल की शिक्षण पद्दति से खुश हैं अभिभावक

नई दिल्ली (News4city)- उत्तम नगर के मोहन गार्डन स्थित मुनि इंटरनेशनल स्कूल में पीटीएम (पेरेंटस्-टीचर मिटिंग) का आयोजन किया गया। जिसमें हर बार की भांति इस बार भी यहां पढ रहे छात्रों के अभिभावकों ने काफी संख्या में भाग लिया और अपने बच्चों को शिक्षित करने वाले अध्यापकों से मिले।

विद्यालय में हर माह के दूसरे शनिवार को आयोजित होने वाली पीटीएम का खास महत्व रहता है, क्योंकि इस दिन अभिभावक यहां पढने वाले अपने बच्चों की शिक्षण स्थिती व अन्य व्यवहार कुशलता के बारे में अध्यापकों के साथ चर्चा करते हैं, ताकि छात्रों की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।

यहां के छात्रों में अंग्रेजी बोलने का चलन, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास देखते ही बनता है, जो छात्र जीवन व समाज की आवश्यकता है।

जब अभिभावकों से जाना गया कि मुनि इंटरनेशनल स्कूल में क्या खास बात है, तो उनका एक ही जवाब मिला की, यहां अन्य स्कूलों के मुकाबले बेहतर और आधुनिक समय की मांग के अनुसार शिक्षा दी जाती है।

यहां आए अभिभावकों का कहना था कि दूसरे स्कूलों के छात्र 10वीं-12वीं के बाद तक जो चीजें सीखते रहते हैं, वही सब मुनि इंटरनेशनल स्कूल के छात्र तीसरी कक्षा से 5वीं कक्षा तक आते-आते सीख जाते हैं। यहां के छात्रों में अंग्रेजी बोलने का चलन, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास देखते ही बनता है, जो छात्र जीवन व समाजकी आवश्यकता है।

अभिभावकों का कहना था कि विद्यालय जिस प्रकार से यहां के छात्रों को आधुनिक दौर के साथ चलने के लिए तैयार करने के लिए नित्य नई चीजें सिखाते हैं वह काबिले तारीफ है।

जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक दिवसीय लाइफ सेवर कार्यशाला आयोजित

नई दिल्ली (news4city)-दिल्ली सरकार के जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल  एक दिवसीय  लाइफ  सेवर  कार्यशाला का आयोजन किया  गया।  इस कार्यशाला में 70 से अधिक लोगों ने भाग लिया। जिसमें मुख्यता दिल्ली फायर सर्विस एवं  दिल्ली पुलिस के ऑफिसर्स शामिल थे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आग लगने पर आने वाली आपदाओं से  इमरजेंसी को मैनेज करना सिखाना था।   कार्यक्रम के पश्चात सभी पार्टिसिपेंट्स को  लाइफ  सेवर रजिस्ट्रेशन नंबर और सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। 
कार्यक्रम  के मुख्यअतिथि रहे कमर वाहिद नक़वी ने कहा कि इस अस्पताल की तरह अन्य अस्पतालों में भी इस प्रकार के प्रयास किए जाएं ,ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें।
कार्यक्रम में आये प्रतिभागियों ने जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल  के निर्देशक डॉक्टर  मनमोहन मेहंदीरत्ता के इस प्रयास को पूरे देश में ले जाने की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा  गुड-समैरिटन लॉ  गाइडलाइंस के बारे में भी  लोगों को जागरुक किया गया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग दुर्घटनाग्रस्त लोगों की मदद के लिए  आ सके। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर अशोक कुमार ने बताया कि अक्सर  अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज प्राथमिक उपचार ना मिलने की वजह से जान गंवा बैठते हैं ,ऐसी परिस्थिति में यह प्रयास  अनिवार्य हो कि पीङित को प्राथमिक उपचार के सहारे अस्पताल तक पहुंचाया जाए।

कार्यक्रम के संयोजक डॉक्टर नितिन  शाक्या  द्वारा बताया गया कि  हमारा प्रयास है कि अगर हमें स्वस्थ भारत की कल्पना करनी है तो हमें शुरुआत प्राथमिक उपचार से करनी होगी तभी हम सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को पूरा कर पाएंगे I इसमें डॉक्टरों के साथ-साथ आम नागरिक का जोड़ना भी आवश्यक है I

मुनि इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों से रूबरू हुए विधायक शिवचरण गोयल

नई दिल्ली(News4city)- उत्तम नगर के मोहन गार्डन स्थित मुनि इंटरनेशनल स्कूल में 6 जुलाई को दिल्ली के मोती नगर क्षेत्र से विधायक शिवचरण गोयल ने अपने साथियों के साथ विद्यालय का भ्रमण किया। विद्यालय पहुंचने पर विद्यालय प्रबंधक अशोक ठाकुर व प्रशासनिक अधिकारी आशा सिंह ने विधायक व उनके साथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।इसके बाद विद्यालय प्रबंधक अशोक ठाकुर ने विधायक व उनके साथियों को मुनि इंटरनेशनल स्कूल की गतिविधियों व स्कूल के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से बताया।  विद्यालय पहुंचे विधायक श्री गोयल के स्वागत में छात्रों ने देश व विदेशी भाषाओं में गीत गाया। इसके बाद अतिथियों का एक्यूप्रेशर चैक किया और विभिन्न कक्षाओं में उनके साथ जाकर उन्हें विद्यालय की शिक्षा प्रणाली के बारे में विस्तार से समझाया। विद्यालय भ्रमण पर आए विधायक व उनके साथी यहां के छात्रों की दिनचर्या व शिक्षा पद्दति को समझ कर काफी अभीभुत हुए।

इतनी कम उम्र के छात्रों का जोश, आत्मविश्वास और कुशल व्यवहार व नेतृत्व क्षमता देख विधायक व उनके साथी दंग रह गए।

विद्यालय में लगभग दो घंटे से अधिक समय बिताने के बाद विधायक शिवचरण गोयल ने बताया कि यह स्कूल अन्य स्कूलों से हट कर है। बिना किसी अध्यापक के मार्गदर्शन में छात्रों द्वारा स्कूल के उद्देश्यों, दिनचर्या व यहां होने वाली गतिविधियों के बारे में बङी ही कुशलता के साथ समझाना दर्शता है कि यहां के छात्र अन्य स्कूलों से खास हैं। 

श्री गोयल ने माना कि मुनि इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधकों व अध्यापकों का बेहतर प्रयास है कि वो अपने स्कूल में छात्रों को आधुनिक दौर की शिक्षा व सफल जीवन के लिए व्यवहारिक ज्ञान भी दे रहे हैं। विधायक शिवचरण गोयल ने कहाकि वो इस स्कूल की शिक्षण-प्रणाली को अन्य स्कूलों में अपनाने के लिए सरकार से भी आग्रह करेंगे।

विद्यालय प्रबंधक अशोक ठाकुर का मानना है कि किताबी ज्ञान तो बच्चा कहीं से भी ले सकता है, लेकिन राष्ट्रहित में सोचना, समाज के उत्तथान का चिंतन करना और जीवन में सार्थक सिद्ध होने वाली शिक्षा उसे कहीं नहीं दी जाती, जोचिंता का विषय है, इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए ही हमने अपने छात्रों के लिए खास तरह की प्रशिक्षण पद्दति को अपनाया और हम सफल भी हुए।

श्री ठाकुर ने बताया कि मुनि इंटरनेशनल स्कूल में 7 देशों की भाषाएं सिखाने के साथ अग्रेजी को व्यवहार में अपनाया जाता हैं, देशी-विदेशी गीत-संगीत सिखाया जाता है। देश व समाज के लिए बेहतर काम करेने की प्ररेणा दी जाती है, जेब्रा-क्रॉसिंग समझाया जाता है, आपदा-प्रबंधन व आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाते हैं, ताकि युवाओं को जीवन में काम आ सकें और वो समाज में भी योगदान दे सके।

डीयू एकेडेमिक काउंसिल से पास हुआ स्कूल ऑफ जर्नलिज्म कोर्स

 कॉलेज टीचर्स बन सकेंगे सुपरवाइजर , एमफिल और पीएचडी में लागू होगी नेशनल रिजर्वेशन पॉलिसी

नई दिल्ली (संवाददाता)-दिल्ली यूनिवर्सिटी की एकेडेमिक काउंसिल की तीसरे दिन भी मीटिंग में लंबी बहस हुई ।सेल्फ फाइनेंस कोर्स को लेकर दो दिन चली इस बहस के बाद आखिरकार पीजी डिप्लोमा कोर्स इन साइबर सिक्योरिटी लॉ, दिल्ली स्कूल ऑफ ट्रांसनेशन अफेयर्स और दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म कोर्स को आखिरकार एकेडेमिक काउंसिल ने इस कोर्स को पारित कर दिया।

एकेडेमिक काउंसिल के मेंबर प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘ने बताया है कि जर्नलिज्म कोर्स व दो अन्य कोर्स को लेकर दो दिन तक लंबी बहस हुई और आखिरकार इस कोर्स को सेल्फ फाइनेंस के आधार पर नहीं बल्कि अन्य पाठ्यक्रमों को तरह फीस स्ट्रेक्चर होगा ।इस कोर्स को कॅरियर की दृष्टि से बाहर से प्रसिद्ध पत्रकारों, फिल्मकारों,डायरेक्टर, टीवी चैनलों में काम करने वाले लोगों को समय-समय पर बुलाया जाएगा ।डीयू में भी फॉरेन यूनिवर्सिटी की तर्ज पर स्कूलों की स्थापना के माध्यम से कॅरियर वाले सब्जेक्ट छात्रों को पढ़ाएं जाएं ताकि कोर्स के साथ बाजार के अनुरूप सर्विस मिले ।डीयू चाहता है कि वे अपने छात्रों को रोजगार देने वाली शिक्षा से उन्हें जोड़े ।
एमफिल-पीएचडी एडमिशन में लागू होगी-नेशनल रिजर्वेशन पॉलिसी.  प्रो. हंसराज सुमन ने बताया है कि एकेडेमिक काउंसिल ने एससी/एसटी, ओबीसी के शोधार्थियों के लिए पहली बार नेशनल रिजर्वेशन पॉलिसी को अडॉप्ट किया है ।अब इन वर्गों केआरक्षित सीटों पर आरक्षण के हिसाब से एडमिशन दिया जाएगा ।
प्रो. सुमन ने यह भी बताया है कि कॉलेजों में पढ़ाने वाले एडहॉक टीचर्स अब पढ़ाने के साथ-साथ अपनी पीएचडी कर सकते हैं । रेजीडेंसी पीरियड किया समाप्त–प्रो सुमन ने बताया है कि पीएचडी करने वाले शोधार्थियों के लिए दो साल का कम्पलसरी रेजीडेंसी पीरियड होता था जिसमें वे कहीं कोई कार्य नहीं कर सकते थे, शोधार्थियों पर अब यह नियम लागू नहीं होगा ।
उन्होंने यह भी बताया है कि काफी अरसे से की जा रही मांग को एकेडेमिक काउंसिल ने उसे स्वीकार कर लिया ।अब कॉलेजों के टीचर्स भी शोधार्थियों को पीएचडी करा सकेंगे ।पहले उसे तीन साल का प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद पीएचडी छात्र मिलता था, अब ऐसा नहीं होगा ।
कमजोर वर्गों के छात्रों को दी जाएगी स्कॉलरशिप- एकेडेमिक काउंसिल ने एक अहम फैसला लिया है जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए विशेष स्कॉलरशिप दिए जाने का प्रावधान किया है ।यह स्कॉलरशिप उन्हें स्ट्डी में अच्छी परफॉर्मेंस के आधार पर दी जाएगी ।
डीयू में बनेगा इंटरनेशनल स्टूडेंट सेंटर—--एकेडेमिक काउंसिल में एक अहम फैसला ,तीन नए कोर्स पास करते समय कहा कि डीयू में भी इंटरनेशनल स्टूडेंट सेंटर की जल्द ही स्थापना की जाएगी ,जिसके माध्यम से बाहर से आने वाले मेरिटोरियस स्टूडेंट्स को भी स्कॉलरशिप देने का प्रावधान करेंगे ।
दूसरे मीडिया संस्थानों से करेंगे सम्पर्क–-कोर्स की उपयोगिता को देखते हुए दूसरे मीडिया संस्थानों/घरानों से भी इन कोर्सो के लिए सम्पर्क किया जाएगा साथ ही उनके साथ प्रोग्राम किए जाएंगे ।
चार कॉलेजों को मिले नए कोर्स—डीयू के चार कॉलेजों को नए कोर्स शुरू करने के लिए जिसमें सर्टिफिकेट कोर्स इन चाइनिज एंड जैपनीज लेंग्वेज—रामजस कॉलेज ,सर्टिफिकेट कोर्स इन चाइनिज, जैपनीज इन कोरिया लेंग्वेज–दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज, डिप्लोमा इन चाइनिज एंड जैपनीज लेंग्वेज–लक्ष्मीबाई कॉलेज ,एडवांस डिप्लोमा इन चाइनिज एंड जैपनीज लेंग्वेज–सेंट स्टीफ़न कॉलेज को ये लेंग्वेज कोर्स दिए हैं ।
परमानेंट अपॉइंटमेंट के लिए एक्सपर्ट पैनल को मंजूरी—-डीयू के विभागों में लगभग 1हजार और  पिछले दस साल से कॉलेजों में खाली पड़ी 4500 टीचर्स की पोस्ट को भरने के लिए एकेडेमिक काउंसिल ने एक्सपर्ट पैनल बनाने की मंजूरी दे दी है ।इस पैनल में विभागों के सभी एसो. प्रोफेसर व प्रोफेसर के नामों को मंजूरी दी है जो एक्सपर्ट के रूप में होंगे ।साथ ही बार-बार एक ही पैनल नही जाएगा ।पैनल की अवधि दो साल तक मान्य होगी ।
कुछ विभागों के जेनरिक कोर्स व अन्य पास किए—–सीबीसीएस सेमेस्टर के दौरान कुछ नए व जोड़े गए सब्जेक्ट पास किए गए इसमें कॉमर्स में जीएसटी बीए, बीकॉम में थोड़ा बदलाव किया है।इकनॉमिक्स में स्किल इन्हर्समेंट बीए/बीकॉम में बदलाव किया।डिपार्टमेंट ऑफ कम्यूटर साइंस में एमसीए, एमसीएस आदि चार नए विषय जोड़े ।दर्शनशास्त्र, संगीत, बुद्धिस्ट ,पंजाबी, समाजशास्त्र, बंगाली आदि विभागों ने नए विषय जोड़े है ।
डीयू देगी रिसर्च पर अवार्ड—डीयू की एकेडेमिक काउंसिल में मदन गोपाल सेठ और सुशीला सेठ द्वारा संगम सुधार स्कॉलरशिप संस्कृत, दर्शनशास्त्र में अच्छी रिसर्च करने वालों को स्कॉलरशिप दी जाएगी ।
चार दिन चली एकेडेमिक काउंसिल में कई अहम फैसले लिए गए हैं वीमेंस रिसर्च स्कॉलर/टीचर्स डीयू, हेल्थ सेंटर आदि वीमेंस के लिए हॉस्टल की सुविधाएं उपलब्ध कराने का वायदा किया गया है ।
प्रो सुमन ने बताया है कि दयालसिंह कॉलेज सांध्य को मॉर्निग करने संबंधी प्रपोजल आया जिसमें कॉलेज के लोगों से, छात्र, कर्मचारियों और टीचर्स से फीडबैक लेकर विचार करने को कहा गया है ।
इसके अतिरिक्त प्रमोशन, पेंशन और छात्रों का सही समय पर एडमिशन ,कॉलेजों व विभागों में जल्द ही परमानेंट अपॉइंटमेंट के साथ साथ प्रमोशन के लिए एक सब कमेटी गठित की जो ये मामले देखेगी ।
प्रो. सुमन ने बताया है कि चार दिन तक चली एकेडेमिक काउंसिल ने लंबे समय से जिन मुद्दों पर चर्चा नही हुई थी और समाधान नहीं हुआ था, आम सहमति से तमाम समस्याओं का समाधान और उन पर आम सहमति से पास हुए । आज की मीटिंग सुबह 8बजे तक चली ।

सूचना एवं साइबर असुरक्षा कारोबार संचालन में सबसे बड़ा जोखिम है : फिक्की

पिछले साल से दो पायदान ऊपर चढ़ा ‘आतंकवाद और चरमपंथ’ का बड़ा जोखिम

नई दिल्ली 23 जून (समाचार डेस्क)- फिक्की द्वारा आज जारी फिक्की-पिंकर्टन इंडिया रिस्क सर्वे में 12 ऐसे जोखिम की चर्चा की गई है जो इस देश में कारोबार की धारणा और संचालन के लिए सबसे प्रमुख खतरे हैं। नए जमाने के जोखिम एक-दूसरे से परस्पर संबद्धित हैं और सभी क्षेत्रों, कार्यक्षेत्र और इलाकों में अतिव्यापित हैं। इस साल के सर्वेक्षण के आधार पर पहचाने जाने वाले नए जोखिमों में शामिल हैं: अनुपालन न होने का जोखिम, कारोबारी निवेश जोखिम और कानूनी नियामक जोखिम।फिक्की- पिंकर्टन इंडिया रिस्क सर्वे (आइआरएस) 2017 में ‘सूचना एवं साइबर असुरक्षा’ को साल 2017 का सबसे बड़ा जोखिम बताया गया है। देश में जिस तरह से विभिन्न परिसंपत्तियों का डिजिटाइजेशन हो रहा है और सेवाएं इंटरनेट तथा मोबाइल के माध्यम से मिलने लगी हैं, उसको देखते हुए ‘सूचना एवं साइबर असुरक्षा’  का जोखिम ज्यादा सुस्पष्ट हो गया है और अभी ऐसी खामियां बनी हुई हैं जिनको हैकर्स भेद सकते हैं। वानक्राइ मालवेयर की घटना इस साल की अभी तक की सबसे बड़ी घटना है, जिसके तहत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बहुत से कंप्यूटरों पर हमला हुआ। इसलिए मुख्य जोर इस बात पर होना चाहिए कि साइबर सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा प्रणाली बनाई जाए।

‘आतंकवाद और चरमपंथ’ का जोखिम पिछले साल से दो पायदान ऊपर हो गया है और इसे इस साल भारत में कारोबार जगत के लिए दूसरा सबसे बड़ा खतरा माना गया है। साल 2000 से 2016 के बीच आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 देशों की सूची वाले वैश्विक आतंकवाद सूचकांक (जीटीआइ) में भारत का उल्लेख 16 बार किया गया है। कम्युनिस्ट आतंकी संगठनों द्वारा किया जाने वाला वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) सबसे गंभीर आतंकी खतरा बना हुआ है। ‘आतंकवाद और चरपमंथ’ से लगातार बने जोखिम भारतीय बाजार में निवेश की इच्छा रखने वाले निवेशकों के मन में जोखिम की अवधारणा पैदा करते हैं। हालांकि, भारत ने प्रभावी आतंक निरोधी और चरमपंथ निरोधी गतिविधियां चलाने के लिए अपनी सुरक्षा क्षमता में भारी निवेश किया है, लेकिन इस जोखिम की धारणा का जो असर है उससे कारोबार खासकर विदेशी निवेश पर अब भी असर पड़ रहा है।

‘भ्रष्टाचार, घूसखोरी और कॉरपोरेट जालसाजी’ को आइआरएस 2017 में तीसरा स्था मिला है। विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस 2017 रैकिंग में 189 देशों में से भारत को 130वां स्थान मिला है। कुल मिलाकर यह एक धारणा है कि जीएसटी, नोटबंदी, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया जैसे नियामक उपायों से भ्रष्टाचार कम हो रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार का स्वभाव ऐसा है कि यह पूरी तरह से खत्म नहीं हो सकता।

इंडिया रिस्क सर्वे 2017 में ‘प्राकृतिक आपदाओं’  को कारोबार के लिए चौथा सबसे बड़ा जोखिम माना गया है, जबकि पिछले साल इसे सातवें स्थान पर रखा गया था। प्राकृतिक आपदाओं के मामले में भारत को ‘उच्च जोखिम’  वाला देश माना जाता है और बाढ़ को देश में कारोबार जगत और समुदायों के लिए सबसे प्रमुख जोखिम में से एक माना जाता है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत के पास इस बात की गुंजाइश है कि वह प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, भूकंप और चक्रवात आदि (जिनकी वजह से हर साल जन-धन की भारी तबाही होती है) के प्रतिकूल असर को कम करने के लिए अपनी संस्थागत क्षमता, वित्तीय संसाधन और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर सके। दिसंबर 2016 में चेन्नई में आने वाले वरदा चक्रवात की वजह से अर्थव्यवस्था को करीब 141 अरब रुपये का नुकसान हुआ था।

‘आग’  को इस साल पांचवें स्थान पर रखा गया है, जो पिछले साल की रैंकिंग से तीन पायदान ऊपर चढ़ गया है। एनसीआरबी के अनुसार साल 2015 में भारत में आग लगने की दुर्घटना के कुल 18,450 मामले सामने आए, जिनमें 1,193 लोग घायल हुए और 17,700 लोग मारे गए।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक अक्षमता इंडिया रिस्क सर्वे में साल 2016 और 2017 में लगातार छठे जोखिम के पायदान पर बरकरार है। सामाजिक तनाव और अशांति तथा कृत्रिम राजनीतिक गतिरोध बाधा बने हुए हैं।

पिछले साल के सर्वे के विपरीत इंडिया रिस्क सर्वे 2017 में ‘हड़ताल, बंदी और अशांति छठे पायदान से नीचे आकर सातवें पर पहुंच गए हैं। हालांकि, देश में श्रमिक अशांति काफी व्यापक रही और इसकी वजह से कारोबारी निरंतरता में बाधा आई तथा संचालन लागत में बढ़ोतरी हुई। सितंबर 2016 में ‘दुनिया की सबसे बड़ी’  औद्योगिक कार्रवाई में भारत सरकार की श्रम और आर्थिक नीतियों के विरोध में सार्वजनिक क्षेत्र के करीब 18 करोड़ श्रमिकों ने 24 घंटे का आम हड़ताल किया। शारीरिक परिश्रम की प्रमुखता वाले उद्योगों की, जहां कम कुशल श्रमिक काम करते हैं, इस बात के लिए आलोचना होती है कि उनके यहां कार्य दशाएं उपयुक्त नहीं हैं और वे संतोषजनक वेतन नहीं देते। कृषि क्षेत्र में, जहां जनसंख्या का करीब 47.2 फीसदी हिस्सा लगा हुआ है, किसानों की दुर्दशा की वजह से बड़े पैमाने पर आंदोलन हो रहे हैं। जून 2017 में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों ने अपने पैदावार के लिए ज्यादा दाम तथा कर्जमाफी की मांग को लेकर आंदोलन किया जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों और थोक बाजारों तथा मैन्युफैक्चरिंग उद्योग के लिए सब्जियों, फलों और मीट जैसे कच्चे माल की आपूर्ति पर असर पड़ा।

अपराध भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता बना हुआ है, क्योंकि यह कानून-व्यवस्था की खामी को दर्शाता है और समाज के सभी वर्गों को प्रभावित करता है। पिछले साल के इंडिया रिस्क सर्वे में तीसरे पायदान से उतरकर ‘अपराध’  इस साल एक जोखिम कारक के रूप में आठवें पायदान पर पहुंच गया है। हालांकि, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार साल 2015 में भारत में कुल अपराध में 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान कुल 73,26,099 अपराध दर्ज हुए जिनमें से 29,49,400 अपराध भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) के तहत और 43,76,699 अपराध विशेष और स्थानीय कानूनों (एसएलएल) के तहत दर्ज हुए। देश के बड़े शहरों में दर्ज हुए अपराधों में से 25 फीसदी हिस्सा अकेले दिल्ली का है।

आइआरएस 2017 में ‘कारोबारी जासूसी’  एक स्थान ऊपर चढ़कर नौवें पायदान पर पहुंच गया है। कारोबारी जासूसी की इस विरासत की समस्या का एक दूरगामी असर होता है जिससे किसी कंपनी को भारी नुकसान हो सकता है।

‘बौद्धिक संपदा (आइपी) चोरी’  एक पायदान बढ़कर इस बार दसवें स्थान पर पहुंच गया है। यूएस स्पेशल 301 सूची में भारत का दर्जा इसे सबसे पसंदीदा देशों में शामिल नहीं करता। फिल्मों, संगीत और सॉफ्टवेयर की नकल तथा पाइरेसी जैसे मसले तथा अन्य गैरकानूनी गतिविधियां अब भी जारी हैं।

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के खतरे को ग्यारहवें पायदान परखा गया है। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर जोखिम का खतरा और उसके निहितार्थ बहुत महत्वपूर्ण हैं। आइआरएस 2017 में इस जाखिम पर विशेष ध्यान दिया गया है, क्योंकि इस बात के लिए प्रबल और व्यापक जागरूकता पैदा करने की जरूरत है कि महिलाएं कार्यस्थल पर और वहां से आते-जाते समय सहज और सुरक्षित महसूस कर सकें।

आइआरएस 2017 में ‘दुर्घटनाओं’ को 12वें पायदान पर रखा गया है। दुर्घटनाओं की बड़ी संख्या, चाहे वह औद्योगिक हो या व्यक्तिगत, कारोबार के लिए एक बढ़ते बोझ की तरह हैं, खासकर बीमा क्षेत्र के लिए।

फिक्की के महासचिव डॉ. ए दीदार सिंह ने इस बारे में कहा, “कारोबारी प्रतिष्ठानों पर जोखिम देश की तरक्की और विकास के लिए नुकसानदेह होता है। वैश्विक स्तर पर देखें तो जोखिमों की प्रकृति में काफी बदलाव आया है, और उनका घटित होना ज्यादा अप्रत्याशित होता जा रहा है तथा उनका असर ज्यादा गहरा होता जा रहा है, इसलिए जोखिमों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। ऐसे बदलते हुए समय में उभरते हुए जोखिमों को समझना महत्वपूर्ण हो गया है।”

पिंकर्टन के मैनेजिंग डायरेक्टर -भारत एपीएसी और ईएमईए- ग्लोबल स्क्रीनिंग रोहित कर्नाटक ने कहा, “आज के गतिशील वातावरण में जिस तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है, उसके लिए ज्यादा समग्र रणनीतिक रवैया अपनाने की जरूरत है और इसलिए इस बात की तत्काल आवश्यकता बढ़ जाती है कि सुरक्षा प्रबंधन से संबंधित जानकारी खुद तक सीमित रखने वाले रवैए की जगह ज्यादा समग्र उद्यमी जोखिम प्रबंधन के लिए एक ज्यादा सहयोगी प्रक्रिया अपनाई जाए।”

मेदांता मेडिसिटी में हुआ कम उम्र के बच्चे का पहला विशेष किडनी प्रत्यारोपण

माँ ने दिया अपनी तीन साल की लड़की को गुर्दा दान

नई दिल्ली (समाचार डेस्क)- मेदांता – द मेडिसिटी को किडनी प्रत्यारोपण में एक बड़ी सफलता मिली है, जहां सार्क क्षेत्र के सबसे छोटे बच्चे में एबीओ असंगत किडनी प्रत्यारोपण किया है। मेदांता – द मेडिसिटी के किडनी इंस्टीट्यूट के एसोसिएट निदेशक डॉ. श्याम बंसल, पेडिएट्रिक नेफ्रोलॉजी एवं पेडिएट्रिक रीनल ट्रांसप्लांट के कंसल्टेंट डॉ. सिद्धार्थ सेठी, रीनल ट्रांसप्लांट के एसोसिएट निदेशक डॉ. प्रसून घोष के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने 10 किलो वजन वाली तीन साल की बच्ची पर एक आश्चर्यजनक सर्जरी की। यह बच्ची जन्म से ही ‘रिफ्लक्स नेफ्रोपैथी’ से पीड़ित थी जिसमें मूत्र वापस गुर्दे में चला जाता है।प्रत्याशा नामक इस बच्ची को मात्र 3 वर्ष की उम्र में ही किडनी फेल्योर हो गया। उसे जल्द से जल्द किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता थी, लेकिन उससे रक्त समूह मैच करने वाला कोई दाता उपलब्ध नहीं था। इसके कारण अन्य परिवारों में भी दाता को खोजने का प्रयास किया गया और दान किये गये शव की सूची में भी रक्त समूह मैच करने वाले शव की खोज की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। छह महीने तक रक्त समूह मैच करने वाले दाता की असफल खोज करने के बाद, मेदांता अस्पताल में गुर्दा एवं मूत्रविज्ञान संस्थान ने मां को दाता के रूप में लेने की योजना बनाई, जो एक रक्त समूह असंगत प्रत्यारोपण था। बच्ची का ब्लड ग्रूप बी पॉजिटिव था जबकि माँ ए पॉजिटिव थी।

इस अवसर पर मेदांता – द मेडिसिटी के पेडिएट्रिक नेफ्रोलॉजी एवं पेडिएट्रिक रीनल ट्रांसप्लांट के कंसल्टेंट डॉ. सिद्धार्थ सेठी ने कहा, ‘‘हमने अक्टूबर 2014 में पहले ही 12 वर्ष के बच्चे पर रक्त समूह मैच नही करने वाला भारत का पहला बाल असंगत किडनी प्रत्यारोपण किया था। रक्त समूह असंगत प्रत्यारोपण का सबसे बड़ा जोखिम हाइपरएक्यूट रिजेक्शन (किडनी प्रत्यारोपण के दिन ही काम करना बंद कर सकता है) होता है। सर्जरी की गंभीरता को देखते हुए, हमने एंटीबॉडी को हटाने के लिए इम्यूनोएडजॉर्प्शन कॉलम के साथ एक प्रोटोकॉल तैयार किया, और फिर 5 अप्रैल को किडनी प्रत्यारोपण का आयोजन किया। चूंकि, मां का ब्लड ग्रूप अलग था, इसलिए बच्चे में डिजाइन किए हुए डिसेंसिटाइजेशन और इम्यूनोसप्रेसिव प्रोटोकॉल के साथ दाता के रूप में मां से गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया।’’

मेदांता – द मेडिसिटी के पेडिएट्रिक नेफ्रोलॉजी एवं पेडिएट्रिक रीनल ट्रांसप्लांट के कंसल्टेंट डॉ. सिद्धार्थ सेठी ने कहा, ‘‘बच्ची में प्रत्यारोपण के बाद आश्चर्यजनक रूप से सुधार हुआ। उसकी ग्राफ्ट की हुई किडनी बहुत अच्छा कार्य कर रही है। भारत में इम्यूनोएडजॉर्प्शन प्रोटोकॉल को पहली बार एक छोटे बच्चे में इस्तेमाल किया गया है। यह सार्क का भी सबसे कम उम्र का रक्त समूह असंगत किडनी प्रत्यारोपण है। बच्ची वर्तमान में पूरी तरह से सामान्य है, और सामान्य जीवन जी रही है।’’

प्रत्यारोपण के लिए दान दिये जाने वाले शव (मृत्यु के बाद दान) की कमी एक वैश्विक समस्या है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में करीब 2,20,000 लोग गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिनमें से हर साल केवल 7,000 लोग ही प्रत्यारोपण प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले 30 में से केवल 1 व्यक्ति को ही गुर्दा प्राप्त होता है। मेदांता – द मेडिसिटी ऐसे लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगी और उन्हें गुर्दा प्रत्यारोपण करने का विकल्प प्रदान करेगी, भले ही रक्त समूह मैच न करता हो।

मेदांता – द मेडिसीटी के किडनी इंस्टीट्यूट के एसोसिएट निदेशक डॉ. श्याम बंसल ने कहा, ‘‘वर्तमान में डायलिसिस के लिए इंतजार कर रहे रोगियों की सूची को देखते हुए, परिवारों में किडनी की खोज करने या रक्त समूह असंगत किडनी प्रत्यारोपण में असफल होने के कारण संभावित जीवित दाताओं के समूहों का विस्तार करने की आवश्यकता है। ऐसा न सिर्फ उपलब्ध मृतक दाता के अंगों की संख्या और प्रत्यारोपण के लिए इंतजार कर रहे रोगियों की संख्या के बीच बढ़ती हुए विसंगति के कारण जरूरी है, बल्कि जीवित दाता प्रत्यारोपण में रोगी के जीवित रहने की बेहतर दर के कारण भी यह जरूरी है। इसलिए आम जनता और डॉक्टरों में यह जागरूकता फैलाने पर जोर देना चाहिए कि एबीओ असंगत अंतिम चरण की गुर्दे की बीमारी से पीड़ित बच्चों और वयस्कों के लिए हमेषा असफल साबित नहीं होता है। अब हम अपने रोगियों पर सफल प्रत्यारोपण करने के बाद, रक्त समूह असंगत दाताओं को स्वीकार कर रहे हैं। हमने अब तक अपने केंद्र में 50 से अधिक रक्त समूह असंगत किडनी प्रत्यारोपण किए हैं, जिनमें प्रत्याशा भारत और सार्क में सबसे कम उम्र की रोगी है।’’

रीनल ट्रांसप्लांट के एसोसिएट निदेशक डॉ. प्रसून घोष ने कहा, ‘‘प्रत्याशा सिर्फ 3 साल की थी और उसका वजन 10 किलोग्राम था, इसलिए बच्चे की अपेक्षाकृत छोटे आकार की किडनी के कारण प्रत्यारोपित किडनी के अस्वीकृत होने और सर्जरी की जटिलताएं होने का अधिक खतरा था। उसका पेट छोटा था, लेकिन हमें उसके छोटे पेट में एक वयस्क आकार की किडनी को तकनीकी रूप से प्रत्यारोपित करना था। इसके अलावा जब बच्चे की छोटी वाहिकाओं को दाता की बड़ी किडनी से जोड़ा जाता है तो रक्त वाहिकाओं में थक्के बनने का भी जोखिम होता है। लेकिन प्रत्याशा को सर्जरी के बाद शल्य चिकित्सा से संबंधित कोई जटिलता नहीं हुई।’’

कैप्टन अभिमन्यु ने कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के वक्तव्य पर की तीखी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली (संवाददाता)- हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के वक्तव्य पर प्रतिक्रिया  करते हुए कहा कि कांग्रेस के  10 वर्षों  के कार्यकाल के  दौरान व्यापारियों के हितों में कोई निर्णय नहीं लिया गया। व्यापरियों को परेशान ही किया गया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान अपनी मांगों के लिए व्यापारी  भटकते  रहथे थे। व्यापारियों की कोई सुनवाई नहीं थी। जबकि भाजपा सरकार ने गत ढ़ाई वर्षों के कार्यकाल में व्यापारियों के हितों में अनेक निर्णय लिए। कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि  कांग्रेस के पास मुद्दे ही नहीं हैं। कांग्रेस के नेता आधारहीन राजनीति पर उतर आये हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि  भाजपा सरकार ने व्यापार व उद्यमों से संबंधित  अधिकतर सरकारी प्रक्रियाएं  ऑनलाइन कर दी हैं।  व्यापारियों व उद्यमियों को अनावश्यक रूप से  सरकारी कार्यालयों के  चक्कर लगाने नहीं पड़ते। सी-फार्म को भी ऑनलाइन कर दिया गया है और लाखों सी फार्म ऑनलाइन उपलब्ध करवाए गये हैं।  यह फॉर्म देने में पहले भ्रष्टाचार होता था और व्यापारी परेशान होते रहते थे। राज्य सरकार ने ई-पंजीकरण, कर की ई-अदायगी एवं रिटर्न की ई-फाईलिंग और ई-निविदा की सुविधा शुरू की है। कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में निर्मित खल, बिनौला, बेसन तथा सूती धागे को कर से छूट प्रदान की गई। मेंहदी और बायो डीजल पर लगने वाले वैट को समाप्त किया। ग्राहकों को खरीदे गए माल का बिल लेने के लिए व्यापारियों को प्रोत्साहित करने हेतु सरकार अपना बिल अपना- विकास नामक पुरस्कार योजना शुरू की गई। हर जिले में सबसे अधिक कर अदा करने वाले 3 व्यक्तियों को सम्मानित करने की योजना तैयार की जायेगी। राज्य सरकार ने ई-सेवाओं को लागू करके इंस्पैक्टरी राज से व्यापरियों को राहत दी है।
वित्त मंत्री ने कहा की उद्योगों के लिए बिजली की दरें भी कम की जा रही हैं और इनमे एक रूपये प्रति यूनिट की कमी प्रस्तावित है। उन्होंने कहा की सरकार ने व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन किया है।  व्यापारियों के हित में जिलास्तर पर व्यापारी सलाहकार समितियां  बनाने, किसानों की तर्ज पर व्यापारियों के लिए शेयरिंग फार्मुले पर बीमा योजना लागू करने, 5 लाख रुपए तक का कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों की निर्धारित एक प्रतिशत मार्किट फीस समाप्त करने, वैट/सीएसटी रिफन्ड की अधिकतम वित्तिय सीमा में बदलाव लाने और व्यापारियों के लम्बित मामलों का निपटारा करने के लिए फास्ट ट्रैक प्रणाली लेनेे सहित अनेक फैसले लिए हैं। इनमे से कई फैसले लागु किये जा चुके हैं बाकी लागु होने की प्रक्रिया में हैं। हरियाणा सरकार ने उद्यमियों को एक ही छत के नीचे सभी स्वीकृतियां प्रदान करने और उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए ईज आफ डूईंग बिजनेस की सुविधा शुरू की है। इसी वजह से प्रदान करने में हरियाणा 6वें स्थान पर है जबकि इससे पूर्व ईज आफ डूईंग बिजनेस सुविधा प्रदान करने में राज्य 14वें स्थान पर था। उन्होंने कहा की 20 लाख तक का व्यापार करने वाले व्यापरियों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

 

दिल्ली यूनिवर्सिटी में छ: माह बाद हुई एकेडेमिक काउंसिल की मीटिंग

सेल्फ फाइनेंस कोर्स को लेकर टीचर्स ने किया विरोध , कॉलेजों में पहले गवर्निग बॉडी फिर अपॉइंटमेंट किए जाएं

नई दिल्ली (संवाददाता)-   दिल्ली यूनिवर्सिटी की 6महीने के बाद आज एकेडेमिक काउंसिल की मीटिंग हुई।

मीटिंग में चुने हुए सदस्यों ने  शून्यकाल के दौरान सेल्फ फाइनेंस कोर्स शुरू ना करने संबंधी, सभी सदस्यों ने अपना विरोध जताया ,कॉलेजों द्वारा गलत तरीके से रोस्टर बनाना ,यूजीसी व डीओपीटी के नियमों को दरकिनार करते हुए रोस्टर तैयार करना, 28कॉलेजों में बवर्निग बॉडी का ना होना, फिजिकल एजुकेशन और लायब्रेरियन पोस्ट को रोस्टर में शामिल ना करना ,10-12 साल से लगभग तीन हजार टीचर्स का प्रमोशन न होने ,स्पेशल कोचिंग क्लासे एससी/एसटी ,ओबीसी के छात्रों के लिए, नेट की तैयारी के आरक्षित वर्ग के छात्रों को तैयार करना ,फिजिकल चेलेंज शिक्षकों और छात्रों के लिए रैम्प ,वील चेयर, स्पेशल टाइल्स, लिफ्ट, स्पेशल टुआइलेट ,परमानेंट अपॉइंटमेंट के लिए आवेदन पत्र के साथ फॉर्म भरने में 500 रुपये किया जाना, साथ ही जिन व्यक्तियों ने पहले अप्लाई किया है उससे फॉर्म भरने के पैसे ना लेना के अलावा कुछ कॉलेजिज हिंदी अ,ब,स को एक साथ पढ़ाना के अतिरिक्त इनवायरमेंट स्ट्डी सब्जेक्ट को लागू करते हुए इसी विभाग से टीचर्स लगाए जाए ।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की एकेडेमिक काउंसिल के मेंबर प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘ने शून्यकाल काल के दौरान उन्होंने वाइस चांसलर से मांग की कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में दो साल पहले संसदीय समिति, यूजीसी, एमएचआरडी और डीओपीटी के अधिकारियों ने विजिट किया था उसके बाद एक रिपोर्ट तैयार की गई थी जिसमें एसोसिएट प्रोफेसर, प्रोफेसर और प्रिंसिपल पदों में रिजर्वेशन दिया जाए और आरक्षित वर्गो से भरी जाएं ।प्रो सुमन ने स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग व नॉन कॉलेजियट वीमेंस एजुकेशन बोर्ड में भी इनवायरमेंटल स्ट्डी सब्जेक्ट के रूप में लागू किया जाए ।उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि हर संस्थान/कॉलेज में प्रत्येक छात्र को पढ़ना अनिवार्य है ।
इसके अलावा शून्यकाल के दौरान प्रो सुमन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में शुरू की गई परमानेंट अपॉइंटमेंट के प्रोसेस का स्वागत करते हुए कहा कि जल्द ही कॉलेजों में गवर्निग बॉडी के नाम भेजकर जल्द ही अपॉइंटमेंट शुरू किया जाए ।प्रो सुमन ने रामजस कॉलेज के इकनॉमिक्स विभाग में 2009 में हुई सलेक्शन कमेटी ने मुकेश मीणा को परमानेंट अपॉइंटमेंट किया मगर उसे बाद में एडहॉक कर दिया गया, दिल्ली यूनिवर्सिटी इस केस की जांच कराई जाए ।इसके अतिरिक्त पीएमओ द्वारा भेजा गया पत्र पर ,कॉलेज ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है, यूनिवर्सिटी भी एक कमेटी बनाकर उसकी जांच कराएं, उसमें एसी और ईसी मेंबर को भी रखा जाए ।
मेंबर डॉ. पंकज गर्ग ने कॉलेजों को ओबीसी के दूसरे ट्रांच के लिए अप्लाई करना चाहिए ताकि टीचर्स के खाली पड़े पदों को भरा जा सके ।उन्होंने कॉलेजों के ऑटोनॉमस करने की निंदा की और कहा कि ऑटोनॉमस कॉलेज के माध्यम से उच्च शिक्षा का व्यवसायीकरण किया जाएगा ।कॉलेज दुकानों में तब्दील हो जाएंगी ।डॉ. सचिन ने सांध्य कॉलेज को मॉर्निंग में तब्दील किए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की ,उन्होंने दयालसिंह कॉलेज सांध्य को मोर्निंग किए जाने से वे छात्र जो कहीं काम कर रहे हैं या किसी जगह पर काम करके शिक्षा अर्जित कर रहे हैं, अब उन्हें शिक्षा का अवसर नहीं मिल पाएगा।
डॉ. शशिशेखर सिंह, गौरव गोयलव डॉ. केपी सिंह आदि ने अपॉइंटमेंट, प्रमोशन और 42 उन टेम्परेरी(अस्थायी)टीचर्स को जल्द से परमानेंट करने की मांग उठाई ।इसके अलावा लायब्रेरियन की पोस्ट को रोस्टर में शामिल करना ,श्री अरबिंदो कॉलेज सांध्य, भगिनी निवेदिता कॉलेज, विवेकानंद कॉलेज, दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज आदि में अनियमितताओं पर सवाल खड़े किए ।कई शिक्षकों ने कॉलेजों में पढ़ा रहे शिक्षकों को पीएचडी गाइड बनाया जाए ताकि वह विभागों में वह टीचर्स एसोसिएट प्रोफेसर ,प्रोफेसर के पदों के लिए आवेदन कर सके ।कॉलेजों की ऑटोनॉमस को बचाने की जरूरत पर भी बल दिया ।कुछ सदस्यों ने रामजस कॉलेज में हुई वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग की, साथ ही डीयू द्वारा जल्द ही जांच कमेटी बनाकर इसकी जांच कराई जाए।
कुछ सदस्यों ने पूर्व वीसी के समय ओबीसी एक्सपेंशन से खरीदे गए लेपटॉप जो किसी काम के नही है उसकी भी सही जांच कराई जाएं ।इसके अलावा कॉलेजों ने ओबीसी एक्सपेंशन का पैसा किस मद में खर्च किया है और कितने अपॉइंटमेंट ओबीसी कोटे से हुई है, का पता लगाया जाए ।
काफी समय से एकेडेमिक काउंसिल की मीटिंग ना होने के कारण सभी सदस्यों ने शून्यकाल के दौरान अपनी बात 8 घण्टे तक रखी और मीटिंग चलती रही ।अधिकांश सदस्यों ने कॉलेजों के प्रिंसिपल के खिलाफ मुद्दे रखे। मीटिंग में सदस्य ने सब्जेक्ट पर अपनी बात रखी हंगामे बीच मीटिंग चलती रही।

वीरे की वेडिंग विवाह के मौसम को बनाएगी खास

नई दिल्ली (संवाददाता)- नए अनुभवों व मजेदार मसाले के साथ विवाह के मौसम को हिट करने के लिए आनेवाली फिल्म ‘वीरे की वेडिंग’ तैयार है। सोनम कपूर के साथ हाई कोर्ट की लड़ाई जीतने के बाद फिल्म का क्र्यू बेहतरीन परिणाम देने के लिए संकल्पित है।भारतीय, वैसे भी शादी के मौसम में कुछ खास विस्फोट करने के लिए जाने जाते हैं और माई डे एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित यह फिल्म निश्चित रूप से मनोरंजन चाहने वालों के लिए केक पर आईस क्यूब के रूप में काम करेगी, जैसा निर्माता दावा करते हैं।

आशू त्रिखा द्वारा निर्देशित इस फिल्म में पुलकित सम्राट, जिमी शेरगिल, कृति खरबंदा, सुप्रिया कर्णिक, प्रदीप काबरा जैसी कलाकार किरदार निभा रहे हैं। हाल ही में, राजधानी ने मास्टरपीस की शूटिंग के दौरान इस फिल्म की स्टार-कास्ट की उपस्थिति देखी और उन्होंने मीडिया से बातचीत भी की। फिल्म के बारे में पूछने पर अभिनेत्री कृति खरबंदा ने कहा, ‘यह फिल्म दिल्ली के विवाह पर आधारित है, जो कि कुछ अलग-अलग और नए परिवर्तन के साथ शादी के स्वाद को पूरी तरह से सही साबित करेगी, जैसा पहले नहीं देखा गया।

फिल्म का भविष्य काफी स्पष्ट है और यह आश्वस्त करता है कि यह स्पष्ट रूप से सामान्य बोरिंग शादियों की एकरसता को तोड़ देगा और शादी के प्रेमियों के उत्साह को बढ़ा देगा। यद्यपि, रिलीज की तारीख अभी भी घोषित नहीं की गई है, लेकिन निर्देशक का कहना है कि फिल्म निश्चित रूप से शादी के मौसम पर रिलीज होगी।

मेट्रो के चैथे चरण के कार्य को तेज करने के लिए वेंकैया नायडू ने दिए निर्देश

नई दिल्ली, 20 जून(शशिधर शुक्ला)-  दक्षिणी दिल्ली से सांसद रमेश बिधूड़ी ने आज केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री श्री एम. वेकैंया नायडू से मिलकर उन्हें दिल्ली में मेट्रो के चैथे चरण के कार्य में लगातार हो रहे विलम्ब और दिल्ली मेट्रो की ऐयरोसिटी से तुगलकाबाद तक स्वीकृत लाइन के जैतपुर तक और डिफेंस कालोनी से साकेत तक स्वीकृत लाइन के इग्नू तक विस्तार की जनता की मांग से अवगत कराया।
श्री बिधूड़ी ने वेंकैया नायडू को अवगत कराया कि दिल्ली सरकार गत 2 वर्ष से मेट्रो के चैथे चरण के विस्तार की स्वीकृति को रोके रही और अंततः जब जन दबाव के चलते सशर्त सहमति दी भी तो आर्थिक संसाधनों में अपने हिस्से पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दिखाई जिसके कारण कार्य में प्रगति नहीं हो पा रही है। साथ ही श्री बिधूड़ी ने दक्षिणी दिल्ली के लोगों की दो स्वीकृत लाइनों में विस्तार की मांग की ओर भी वेंकैया नायडू का ध्यान आकृष्ट किया और कहा कि यदि केन्द्र सरकार विस्तार केा स्वीकृत करती है तो दिल्ली के लगभग 10 लाख लोगों को इससे लाभ होगा। इसके अलावा दक्षिणी दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इस इलाके में मेट्रो पहुंचने से सड़क परिवहन पर भी दबाव कम होगा एवं प्रदूषण भी घटेगा।

सांसद बिधूड़ी के प्रतिवेदन पर तुरंत संज्ञान लेते हुये वेंकैया नायडू ने शहरी विकास मंत्रालय के सचिव श्री दुर्गा शंकर एवं दिल्ली मेट्रो के प्रबंध निदेशक श्री मंगु सिंह को कार्यालय में बुलाकर मामले की समीक्षा की और श्री मंगु सिंह की प्रारम्भिक स्वीकृति के बाद श्री नायडू ने श्री बिधूड़ी द्वारा प्रस्तावित दोनों मेट्रो लाइनों के विस्तार को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी।

श्री वेंकैया नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेट्रो के चैथे चरण के कार्य को गति दी जाये और उसी के साथ आज दोनों लाइनों के लिये स्वीकृत विस्तार को दिल्ली सरकार के पास भेजा जाये। श्री नायडू ने मेट्रो अधिकारियांे को निर्देश दिया कि समय की बचत को ध्यान में रखते हुये अविलम्ब दोनों लाइनों पर स्वीकृत विस्तारित क्षेत्र पर तकनीकि जांच कार्य शुरू किये जायें।

श्री बिधूड़ी ने केजरीवाल सरकार द्वारा चैथे चरण के मेट्रो कार्य के लिये आर्थिक संसाधन देने में विलम्ब की कड़ी निंदा करते हुये कहा है कि दिल्ली में आज लगभग 214 कि.मी. मेट्रो लाइने चल रही हैं और पहले की भाजपा एवं कांग्रेस सरकारों ने अपने हिस्से का पैसा नियमानुसार दिया पर वर्तमान केजरीवाल सरकार की नकारात्मक राजनीति के चलते दिल्ली के लगभग 30 लाख से अधिक लोगों को मेट्रो विस्तार मिलने में विलम्ब हो रहा है। उन्होंने केजरीवाल सरकार से मांग की है कि जिस तरह दिल्ली की पिछली सरकारों ने पहले तीन चरणों के लिये आर्थिक संसाधन दिये उसी तरह वर्तमान सरकार भी दे।